तेहरान से उठती आवाज़, जो पूरी दुनिया सुन रही है
ईरान एक बार फिर व्यापक जन-विरोध प्रदर्शनों की चपेट में है। तेहरान से लेकर मशहद, इस्फ़हान और शीराज़ तक सड़कों पर उतरती भीड़ केवल नारों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस गहरे असंतोष की अभिव्यक्ति है जो वर्षों से ईरानी समाज के भीतर दबा हुआ था। हालिया विरोध-प्रदर्शन किसी एक घटना या फैसले का परिणाम नहीं हैं, बल्कि ये आर्थिक संकट, राजनीतिक दमन, सामाजिक असमानता और शासन व्यवस्था के प्रति अविश्वास का सम्मिलित परिणाम हैं।
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| (Iran Protests: Source: X) |
आर्थिक बदहाली: विरोध की जड़ में छुपा सच
ईरान की अर्थव्यवस्था पिछले कई वर्षों से गंभीर संकट से गुजर रही है। महँगाई दर ने आम नागरिक की कमर तोड़ दी है। खाद्यान्न, ईंधन, दवाइयाँ और किराया—सब कुछ आम लोगों की पहुँच से बाहर होता जा रहा है। ईरानी मुद्रा ‘रियाल’ का मूल्य ऐतिहासिक रूप से गिर चुका है, जिससे लोगों की बचत और आय दोनों का वास्तविक मूल्य समाप्त होता जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बेरोज़गारी, विशेषकर युवाओं में, एक विस्फोटक स्थिति तक पहुँच चुकी है। विश्वविद्यालय से निकलने वाले लाखों युवा रोज़गार के अभाव में निराश हैं। यही निराशा अब सड़कों पर गुस्से के रूप में दिखाई दे रही है।
प्रतिबंधों की मार और अंतरराष्ट्रीय अलगाव
ईरान की आर्थिक स्थिति को और कमजोर करने में अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की बड़ी भूमिका रही है। अमेरिका और पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के कारण ईरान का तेल निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जबकि विदेशी निवेश लगभग ठप हो चुका है। अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग व्यवस्था से कटे होने के कारण व्यापार और लेन-देन कठिन हो गया है।
हालाँकि ईरानी सरकार इन प्रतिबंधों के लिए बाहरी शक्तियों को ज़िम्मेदार ठहराती है, लेकिन जनता का एक बड़ा वर्ग यह सवाल उठाता है कि क्या सरकार ने घरेलू स्तर पर हालात सुधारने के लिए पर्याप्त प्रयास किए?
सरकारी नीतियाँ और भ्रष्टाचार पर सवाल
विरोध-प्रदर्शन कर रहे नागरिक केवल महँगाई या प्रतिबंधों के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि वे शासन की नीतियों और भ्रष्टाचार के खिलाफ भी आवाज़ उठा रहे हैं। आम धारणा बनती जा रही है कि देश के संसाधनों का उपयोग जनता की भलाई की बजाय क्षेत्रीय संघर्षों और सैन्य गतिविधियों पर किया जा रहा है।
ईरान में पारदर्शिता की कमी और जवाबदेही का अभाव जनता के गुस्से को और बढ़ाता है। लोग पूछ रहे हैं कि जब देश आर्थिक संकट में है, तब सरकार की प्राथमिकताएँ क्या होनी चाहिए।
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| (Iran Protests: Source X ) |
राजनीतिक दमन और सीमित स्वतंत्रता
ईरान की राजनीतिक व्यवस्था एक धार्मिक शासन प्रणाली पर आधारित है, जहाँ वास्तविक सत्ता सीमित संस्थानों और नेतृत्व के हाथों में केंद्रित है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, राजनीतिक विरोध और स्वतंत्र मीडिया पर सख्त नियंत्रण है।
विरोध-प्रदर्शनों के दौरान सरकार की प्रतिक्रिया ने इस असंतोष को और गहरा किया है। इंटरनेट बंद करना, बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियाँ और सुरक्षा बलों का कठोर रवैया लोगों को शांत करने के बजाय और अधिक आक्रोशित कर रहा है।
महिलाओं और युवाओं की निर्णायक भूमिका
इन विरोध-प्रदर्शनों में महिलाओं और युवाओं की भूमिका विशेष रूप से उल्लेखनीय है। 2022 के “महिला, जीवन, स्वतंत्रता” आंदोलन के बाद से महिलाओं में सामाजिक और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की माँग और अधिक मुखर हुई है। अनिवार्य ड्रेस कोड, व्यक्तिगत जीवन में सरकारी हस्तक्षेप और लैंगिक असमानता जैसे मुद्दे लगातार विरोध का कारण बनते रहे हैं।
युवा पीढ़ी, जो इंटरनेट और वैश्विक दुनिया से जुड़ी है, वर्तमान व्यवस्था को अपनी आकांक्षाओं के विपरीत मानती है। यही कारण है कि ये आंदोलन केवल आर्थिक नहीं, बल्कि पीढ़ीगत टकराव का रूप भी ले चुके हैं।
बाज़ार बंद, हड़तालें और प्रतीकात्मक विरोध
तेहरान के ऐतिहासिक ग्रैंड बाज़ार का बंद होना इन प्रदर्शनों का एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। ईरान के इतिहास में जब-जब बाज़ारों ने विरोध किया है, तब-तब सत्ता को गंभीर चुनौती मिली है। व्यापारियों, शिक्षकों और कर्मचारियों की हड़तालों ने आंदोलन को और व्यापक बना दिया है।
सरकार की चुनौती और भविष्य की दिशा
ईरानी नेतृत्व के सामने यह एक कठिन परीक्षा है। केवल बल प्रयोग से असंतोष को लंबे समय तक दबाया नहीं जा सकता। यदि सरकार आर्थिक सुधार, राजनीतिक संवाद और सामाजिक उदारीकरण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाती, तो ये विरोध-प्रदर्शन और अधिक व्यापक तथा उग्र हो सकते हैं।
दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस स्थिति पर नज़र बनाए हुए है। मानवाधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और क्षेत्रीय स्थिरता के प्रश्न ईरान को वैश्विक विमर्श के केंद्र में ले आए हैं।
निष्कर्ष: केवल विरोध नहीं, बदलाव की माँग
ईरान में हो रहे ये जन-विरोध केवल नाराज़गी का प्रदर्शन नहीं हैं, बल्कि वे सम्मानजनक जीवन, आर्थिक सुरक्षा और राजनीतिक भागीदारी की माँग हैं। यह आंदोलन इस बात का संकेत है कि ईरानी समाज परिवर्तन चाहता है—चाहे वह धीमे कदमों से हो या बड़े सुधारों के माध्यम से।
इतिहास गवाह है कि जब जनता की आवाज़ को लंबे समय तक अनसुना किया जाता है, तो वह और अधिक तीव्र होकर लौटती है। ईरान आज उसी मोड़ पर खड़ा दिखाई देता है।


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