भारत में बढ़ती दूषित पेयजल की समस्या।

जल ही जीवन है, जल है तो कल है, Water is essential for life, इस तरह की कहावतें तो सभी ने कभी न कभी जरूर सुनी या पढ़ी होगी लेकिन आज भारत में इसी पेयजल की नींव कमजोर होती जा रही है। फैक्टियों का गंदा पानी, रसायनिक अपशिष्ट, सीवर का गंदा पानी और खेती में प्रयोग होने वाले कीटनाशक, उर्वरक हमारे जलस्रोतों को दूषित कर रहे हैं, जिससे हैजा, टाइफाइड, डायरिया, पीलिया, जैसी गंभीर बीमारियां फैलती हैं। जिससे विशेष रूप से ग्रामीण और गरीब वर्ग इसकी चपेट मे आते हैं। इसीलिए दूषित पेयजल की समस्या केवल पर्यावरणीय नहीं है बल्कि एक गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य सम्बन्धी चुनौती बन चुकी है। जिसका समय रहते समाधान अत्यंत आवश्यक है। इसी के बारे में हम इस आर्टिकल में चर्चा करने जा रहे हैं।

(Photo credit:- Dainik jagaran)

क्या है दूषित पेयजल?

दूषित पेयजल वह पानी होता है जिसमें रासायनिक, जैविक या भौतिक अशुद्धियाँ शामिल हों। यह पानी न केवल गंदा दिखाई देता है, बल्कि इसमें ऐसे जीवाणु और रसायन होते हैं जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक होते हैं।
दूषित पानी के मुख्य स्रोत -

i) सीवेज के पानी का मिलना (sewage contamination)

ii) औद्योगिक रसायन और भारी धातुएँकृषि रसायन (fertilizers, pesticides)

iii) भूजल में प्राकृतिक प्रदूषक जैसे आर्सेनिक, फ्लोराइड, नाइट्रेट 

 भारत में पेयजल पानी की गंभीर स्थिति

भारत विश्व में सुरक्षित पेयजल के मामले में गंभीर चुनौती में है।

  1. 2026 के आंकड़ों के मुताबिक भारत पेयजल सुरक्षा रैंकिंग में 120 देशों में से 120वें स्थान पर है, यानी लगभग सबसे निचले स्तर पर। 

  2. सुरक्षित पानी का सीधा नुकसान:
  3. सर्वे के अनुसार भारत में केवल लगभग 6% शहरी परिवारों को सीधे पीने लायक नल का पानी मिलता है। 

  4. अर्थशास्त्रीय अनुमान बताते हैं कि भारत में हर साल लगभग 2 लाख मौतें केवल सुरक्षित पानी की कमी के कारण होती हैं। 

  5. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के Global estimates के अनुसार:
  6. दुनिया भर में जलजनित बीमारियों से होने वाली 37.7 मिलियन (3.77 करोड़) से अधिक बीमारी के मामले भारत में आते हैं। 

  7. और अकेले 1.5 मिलियन बच्चों की मृत्यु केवल दस्त (diarrhoea) जैसी बीमारियों के कारण, जो दूषित पानी के कारण होती हैं। 

  8. यह आंकड़ा सिर्फ “संख्या” नहीं है — यह हर परिवार, हर बच्चा, हर किसान और हर मजदूर की कहानी कहता है, जो हर दिन असुरक्षित पानी पीने को मजबूर है।
  9. (Photo credit Dainik jagaran)


दूषित पानी से होने वाली प्रमुख बीमारियाँ

  1. दूषित पानी सीधे हमारे शरीर में प्रवेश करने वाले जीवाणु, वायरस और रसायन के कारण कई जानलेवा रोग फैलाते हैं। मुख्य रोग हैं:
  2. जलजनित रोग

  1. डायरिया (Diarrhoea)

  2. टाइफाइड (Typhoid)

  3. हेपेटाइटिस A & E (Hepatitis)

  4. हैजा (Cholera)

  5. वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण

  6. ये रोग खासतौर पर बच्चों, बुज़ुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों में जल्दी फैलते हैं। 
  7. इन रोगों का प्रभाव सिर्फ स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है — इससे शिक्षा, काम करने की क्षमता और रोज़मर्रा की जिंदगी भी प्रभावित होती है।

2025-26 में भारत के दूषित पेयजल मामलों से जुड़ी घटनाएं 

आइए कुछ ताज़ा घटनाओं और आंकड़ों पर नजर डालते हैं:

इंदौर शहर का बड़ा संकट

दिसंबर 2025 के अंत में मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से 25 लोगों की मौत हो गई थी और 3300 से अधिक लोग बीमार हो गए थे।

अभी जब मैं यह आर्टिकल लिख रहा हूं 24 जनवरी 2026 को मैंने मध्य प्रदेश के महू जिले की खबर पढ़ी जहां महू के कई इलाकों में दूषित पानी पीने से 30 से अधिक लोग बीमार हो गए जिसमें से 26 बच्चे और किशोर शामिल हैं। यह तब और भी चौंकाने वाला है क्योंकि इंदौर को अक्सर “स्वच्छ शहर” के रूप में जाना जाता रहा है।

और आज की ही एक और खबर है दिल्ली के राजौरी गार्डन विधानसभा क्षेत्र के एचएमटी कालोनी की जहां 10 दिन से सीवर जैसा बदबूदार पानी आ रहा है लोग शिकायत करते हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं क्योंकि अधिकारी लापरवाह हैं। और इसका फायदा पानी माफिया उठाते हैं।

(Photo credit Dainik jagaran)


26 शहरों में दूषित नल का पानी

  • 8 जनवरी 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी 2025 से जनवरी 7, 2026 के बीच कम से कम 26 शहरों में दूषित नल के पानी ने 5,500 से ज़्यादा लोगों को बीमार किया और कम से कम 34 लोगों की मौत हुई। 
  • इन शहरों में शामिल हैं:

  • पटना (बिहार)

  • रायपुर (छत्तीसगढ़)

  • बेंगलुरु (कर्नाटक)

  • देहरादून (उत्तराखंड)

  • गांधीनगर (गुजरात)

  • गुवाहाटी (असम)

  • जम्मू (जम्मू और कश्मीर)

  • रांची (झारखंड)

  • इंदौर (मध्य प्रदेश)

  • चेन्नई (तमिलनाडु)

  • गुरुग्राम (हरियाणा)
    और कई अन्य शहर। 

  • यह असल में दिखाता है कि दूषित पानी की समस्या केवल एक जगह का मामला नहीं है — यह एक राष्ट्रीय स्तर की चुनौती है।

इंदिरापुरम, गाज़ियाबाद का मामला

गाज़ियाबाद के इंदिरापुरम के कुछ इलाकों में लोगों ने बताया कि सीवेज पानी के साथ मिल रहा है, जिससे पानी का बदबूदार स्वाद और गंदगी बढ़ गई।
टेस्ट से coliform बैक्टीरिया जैसे खतरनाक सूचक भी मिले, जो पानी को सुरक्षित नहीं रहने देते।

दूषित पानी का सीधा मानव और सामाजिक प्रभाव

  1. स्वास्थ्य पर असर
  2. पानी के कारण फैलने वाले रोगों से न केवल लोगों को दर्द और बुखार होता है, बल्कि यह जीवन-धमकाने वाली स्थिति भी बन जाती है।

  3. बच्चों में दस्त या हैजा जल्दी जानलेवा हो सकता है यदि तत्काल चिकित्सा न मिले।

  4. शिक्षा और काम पर असर
  5. बीमार होने के कारण बच्चे स्कूल से अनुपस्थित रहते हैं और वयस्क काम पर नहीं जा पाते।

  6. भारत में अनुमानित तौर पर 73 मिलियन (7.3 करोड़) कार्यदिवस हर साल पानी-जनित बीमारियों के कारण खो जाते हैं।

  7. आर्थिक बोझ
  8. स्वास्थ्य सेवाओं पर होने वाला खर्च गरीब परिवारों के लिए भारी पड़ता है।

  9. देश की अर्थव्यवस्था भी इन बीमारियों से होने वाली कमाई के नुकसान से प्रभावित होती है।

मुख्य कारण क्यों पानी दूषित होता है?

i) सीवेज का पानी – शहरों में पुरानी और कच्ची पाइपलाइन के कारण सीवेज सीधे पानी की लाइनों में मिल जाता है। 
ii) औद्योगिक कचरा – कारखानों से निकलने वाला अपशिष्ट नदियों, तालाबों और भूजल में चला जाता है।
iii) कृषि रसायन – ज़मीन में ज्‍यादा उर्वरक और कीटनाशक मिलते हैं और बारिश के समय ये भूजल तक पहुंचते हैं।
iv) भूजल में प्राकृतिक तत्व – कुछ प्रदेशों में आवश्यक सीमा से अधिक फ़्लोराइड, आर्सेनिक और नाइट्रेट पाए जाते हैं।

समाधान और उम्मीद

 1. जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission)

सरकार का लक्ष्य हर घर तक सुरक्षित पेयजल पहुँचाना है। इसके तहत सरकार नल-पाइप तक पानी पहुंचाने और स्थानीय जलगुणवत्ता जांचने जैसे काम कर रही है।

 2. स्थानीय जल परीक्षण और निगरानी

निगरानी और पानी की गुणवत्ता जांचने से पहले ही दूषित पानी को ठीक किया जा सकता है।

 3. सीवेज और औद्योगिक कचरे का उपचार

सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) और औद्योगिक अपशिष्ट नियंत्रण बढ़ाना महत्वपूर्ण हैं।

4. जन जागरूकता और शिक्षा

लोगों को पीने योग्य पानी की महत्ता, फ़िल्टर और उबाल के तरीके इत्यादि के बारे में जागरूक करना चाहिए।

निष्कर्ष

भारत में दूषित पेयजल एक गंभीर लेकिन ऊपर उठने योग्य समस्या है। यह ना केवल सरकार की जिम्मेदारी है, बल्कि हर नागरिक की साझी ज़िम्मेदारी भी है कि हम अपने पानी स्रोतों को सुरक्षित रखें, पानी बचाएँ और स्वच्छता पर ध्यान दें।

आज जितनी जल्दी हम इस समस्या को समझेंगे और मिलकर उसका समाधान करेंगे, उतनी जल्दी हम एक स्वस्थ और समृद्ध भारत की दिशा में कदम बढ़ा पाएँगे।


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