नई दिल्ली। भारत–अमेरिका व्यापार संबंधों से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले सामान पर लगाए गए टैरिफ (आयात शुल्क) को घटाकर लगभग 18 प्रतिशत कर दिया है। पहले यह टैरिफ करीब 50 प्रतिशत तक पहुँच गया था। इस फैसले को दोनों देशों के बीच हालिया बातचीत और व्यापार समझौते का नतीजा माना जा रहा है।
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| (Indian PM-US President) |
क्या होता है टैरिफ?
टैरिफ वह कर (टैक्स) होता है, जो कोई देश दूसरे देश से आने वाले सामान पर लगाता है।
टैरिफ ज़्यादा होगा तो विदेशी सामान महँगा हो जाएगा
टैरिफ कम होगा तो सामान सस्ता पड़ेगा
अमेरिका द्वारा टैरिफ घटाने का सीधा मतलब है कि अब भारतीय सामान अमेरिकी बाजार में पहले से सस्ते और प्रतिस्पर्धी हो सकेंगे।
पहले क्यों बढ़ाया गया था टैरिफ?
कुछ समय पहले अमेरिका ने भारत पर कुल मिलाकर लगभग 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया था। इसमें:
लगभग 25% सामान्य व्यापारिक टैरिफ
और 25% अतिरिक्त टैरिफ शामिल था
अमेरिका का आरोप था कि भारत रूस से बड़ी मात्रा में सस्ता कच्चा तेल खरीद रहा है, जिससे रूस को आर्थिक फायदा हो रहा है। इसी को लेकर अमेरिका ने भारत पर दबाव बनाने के लिए अतिरिक्त टैरिफ लगाया था।
टैरिफ घटाने का फैसला कैसे हुआ?
हाल ही में भारत और अमेरिका के शीर्ष नेतृत्व के बीच बातचीत हुई। इस दौरान व्यापारिक रिश्तों को सुधारने और आपसी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। इसके बाद अमेरिका ने भारत पर लगाए गए ऊँचे टैरिफ को घटाकर करीब 18 प्रतिशत करने का ऐलान किया।
यह फैसला एक व्यापक भारत–अमेरिका व्यापार समझौते का हिस्सा माना जा रहा है।
समझौते की मुख्य शर्तें
सूत्रों के मुताबिक इस समझौते में दोनों पक्षों की ओर से कुछ अहम सहमतियाँ बनी हैं:
अमेरिका की ओर से
भारतीय उत्पादों पर टैरिफ में बड़ी कटौती
भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में बेहतर अवसर
भारत की ओर से
रूस से कच्चा तेल खरीदने में धीरे-धीरे कमी
अमेरिका से ऊर्जा, तकनीक और अन्य सामानों की खरीद बढ़ाना
कुछ अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ और व्यापारिक नियमों में ढील
भारत को क्या होगा फायदा?
निर्यात को बढ़ावा
टैरिफ कम होने से भारत के कई क्षेत्रों को फायदा मिलने की उम्मीद है, जैसे:
कपड़ा और रेडीमेड गारमेंट्स
चमड़ा और जूता उद्योग
दवा और मेडिकल उपकरण
इंजीनियरिंग और आईटी उत्पाद
इन क्षेत्रों के उत्पाद अब अमेरिका में सस्ते होंगे, जिससे उनकी माँग बढ़ सकती है।
रोज़गार और उद्योग
निर्यात बढ़ने से देश में उत्पादन बढ़ेगा और इससे नए रोज़गार के अवसर पैदा हो सकते हैं। उद्योग जगत ने इस फैसले का स्वागत किया है।
क्या कोई चिंता भी है?
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि:
अगर अमेरिका से कृषि उत्पादों का आयात बढ़ता है, तो इससे भारतीय किसानों पर असर पड़ सकता है
रूस से सस्ता तेल कम मिलने पर ऊर्जा लागत बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है
हालाँकि सरकार का कहना है कि सभी फैसले राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखकर लिए गए हैं।
कूटनीतिक संकेत
विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। यह भारत–अमेरिका के बीच मजबूत होते रणनीतिक और कूटनीतिक रिश्तों का भी संकेत देता है।
निष्कर्ष
अमेरिका द्वारा भारत पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत किया जाना दोनों देशों के बीच रिश्तों में नरमी और सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे भारतीय निर्यातकों को राहत मिलेगी और वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति और मजबूत हो सकती है।

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